कहानी "तुम लौट कर तो आओगे न!" एक पुरानी यादों और भावनाओं से भरी है। नायक ने फेसबुक पर एक पुरानी साथी को खोजा, जो उसी शहर में थी जहाँ उसने उसे एक दिन छोड़ दिया था। वे एक दूसरे से संवाद करते हैं, और नायिका अपने पुराने पते पर मिलने के लिए उसे आमंत्रित करती है। नायक एक गेस्टहाउस में ठहरा है, जहाँ उसे बीस साल पुरानी यादें ताज़ा होती हैं। वह अपने जीवन की वर्तमान चुनौतियों में उलझा हुआ है, जिसमें एक महत्वपूर्ण पोस्टिंग के लिए मुख्य सचिव को प्रभावित करना शामिल है। उसके पास कई काम हैं, लेकिन पुरानी यादें उसे बार-बार उस नायिका की ओर खींचती हैं, जिससे वह मिलना चाहता है। वह अपनी डायरी में अपने कार्यों की सूची देखता है, जिसमें पुरानी साथी से मिलने का कोई जिक्र नहीं है। कहानी समय के साथ जुड़ी भावनाओं, यादों और पेशेवर चुनौतियों का मिश्रण है, जिसमें नायक अपने अतीत और वर्तमान के बीच संघर्ष कर रहा है। तुम लौट कर तो आओगे न! Nirmal Gupta द्वारा हिंदी लघुकथा 2.4k 2.2k Downloads 9.2k Views Writen by Nirmal Gupta Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण भूले बिसरे प्यार की मार्मिक कथा. More Likes This पहली मुलाक़ात - 1 द्वारा puja नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी