यह कहानी "दिल्ली गर्ल" संजना तिवारी द्वारा लिखी गई है। कहानी में एक महिला अपने लेखन में खोई हुई है, जब उसके पति अनुराग की उपस्थिति उसे अचानक चौंका देती है। अनुराग का व्यवहार उसे असहज करता है, और वह उसकी बेवजह की आवारगी के प्रति असहमति प्रकट करती है। उनके बीच संवाद में तनाव है, जहाँ अनुराग अपनी इच्छाओं को व्यक्त करता है जबकि वह अपनी स्वतंत्रता और विचारों को महत्व देती है। महिला अपने अस्तित्व को पन्नों पर कैद करना चाहती है, लेकिन अनुराग की मादकता और शारीरिक चाहत उसे परेशान करती है। वह उसे गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला मानती है, जो अपनी ज़िम्मेदारियों से भागता है। अनुराग की शारीरिक इच्छाएं उसकी भावनाओं के प्रति एक असंवेदनशीलता को दर्शाती हैं, जिससे महिला आहत महसूस करती है। कहानी इस बात पर ध्यान केंद्रित करती है कि कैसे व्यक्तिगत संबंधों में असमानता और संवाद का अभाव एक दूसरे के प्रति भावनाओं को प्रभावित कर सकता है। महिला की अंतर्दृष्टि और अनुराग का स्वार्थी दृष्टिकोण उनके रिश्ते में तनाव का कारण बनता है। दिल्ली गर्ल संजना तिवारी द्वारा हिंदी लघुकथा 15.4k 2.2k Downloads 9.9k Views Writen by संजना तिवारी Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण Dilli Garla More Likes This उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 3 द्वारा Soni shakya शनिवार की शपथ द्वारा Dhaval Chauhan अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी