विवरण
अध्याय:08मुस्कुराहटोंकाबाजारशहरकेसबसेव्यस्तबाज़ारकीएकछोटीसीदुकानमें'दीनदयाल'अपनीचायबेचतेथे।उनकीदुकानकेठीकबगलमेंएकआलीशानकैफेथा,जहाँहरतरहकीआधुनिकसुविधाएँथीं।लेकिनअजीबबातयहथीकिलोगउसठंडेऔरशांतकैफेकेबजायदीनदयालकीतपतीदुकानपरखड़ेहोकरचायपीनापसंदकरतेथे।बाज़ारकेबाकीदुकानदारइसबातसेहैरानथे। "आखिरदीनदयालकीचायमेंऐसाक्याहै?वहीदूध,वहीपत्ती,फिरभीयहाँइतनीभीड़क्यों?"यहसवालपूरेबाज़ारकेलिएएकसस्पेंसबनाहुआथा।एकदिनशहरकाएकबड़ाव्यापारी,जोअपनीगंभीरऔरचिड़चिड़ीप्रकृतिकेलिएजानाजाताथा,दीनदयालकीदुकानपररुका।वहबहुतगुस्सेमेंथाक्योंकिउसकीएकबड़ीडीलखराबहोगईथी।दीनदयालनेमुस्कुरातेहुएचायकाकुल्हड़उसकीओरबढ़ायाऔरधीरेसेकहा, "सेठजी,आजआपकेकोटकारंगबड़ाहीशानदारहै।आपइसमेंकिसीराजासेकमनहींलगरहे,औरआपकीमेहनतकीतोपूराबाज़ारमिसालदेताहै।"व्यापारीकागुस्साजैसेपलभरमेंहवाहोगया।उसनेपहलीबारगौरकियाकिदीनदयालकेवलचायनहींबेचरहाथा,बल्किवहहरआनेवालेव्यक्तिकीकिसीनकिसीखूबीकीसच्चीप्रशंसाकररहाथा।वहलोगोंमेंवास्तविकरुचिलेताथा—किसीकेबच्चेकीपढ़ाईकेबारेमेंपूछता,तोकिसीकीनईसाइकिलकीतारीफकरता।जैसे-जैसेसमयबीता,लोगोंकादीनदयालपरभरोसाबढ़तागया।लोगअपनीनिजीबातेंऔरपरेशानियाँभीउनकेसाथसाझाकरनेलगे।दीनदयालकीदुकानअबसिर्फएकचायकीदुकाननहीं,बल्किभरोसेकाएककेंद्रबनगईथी।उसीबाज़ारमेंएकऔरदुकानदारथा,जोबहुतचालाकमानाजाताथा।उसनेदीनदयालकीनकलकरनेकीकोशिशकी,लेकिनवहकेवलझूठीतारीफेंकरताथा।लोगोंनेजल्दहीउसकीचालाकीकोपहचानलियाऔरउससेदूररहनेलगे।यहींपरवीडियोकावहमुख्यसंदेशस्पष्टहुआ—"सच्चीप्रशंसाहीलोगोंकोआपकीओरआकर्षितकरतीहैऔरभरोसाजगातीहै।"कुछहीमहीनोंमें,दीनदयालकासम्मानऔरप्रभावइतनाबढ़गयाकिबाज़ारकेहरछोटे-बड़ेफैसलेमेंउनकीरायलीजानेलगी।उन्होंनेबिनाकिसीविज्ञापनकेसमाजमेंअपनीएकअलगपहचानबनालीथी।उसशाम,जबबाज़ारबंदहोरहाथा,दीनदयालनेअपनीदुकानकेगल्लेकोनहीं,बल्किउनमुस्कुरातेचेहरोंकोदेखाजोउनकीएकबातसेखुशहोकरगएथे।उन्होंनेसाबितकरदियाथाकिएकछोटासा'प्रशंसाकाशब्द'किसीकादिनबनासकताहैऔरआपकेरिश्तोंकोपत्थरकीतरहमजबूतकरसकताहै।सीख:इंसानकीसबसेबड़ीभूखप्रशंसाकीहोतीहै।जबआपदूसरोंकीअच्छाइयोंकोपहचानतेहैंऔरउनकीसच्चीसराहनाकरतेहैं,तोआपनकेवलउनकादिलजीततेहैं,बल्किसमाजमेंअपनाप्रभावऔरसम्मानभीबढ़ातेहैं।यादरखिए,झूठीचापलूसीऔरसच्चीप्रशंसामेंवहीफर्कहैजोकांचऔरहीरेमेंहोताहै।दूसरोंकेगुणोंकोपहचानेंऔरउनकीसच्चीप्रशंसाकरें।इससेलोगआपपरभरोसाकरेंगे,आपकेरिश्तेमजबूतहोंगेऔरसमाजमेंआपकासम्मानबढ़ेगा। अध्याय:09कोरेपन्नेऔरस्याहीकीजंगरातकेदोबजरहेथे।शहरकीहलचलशांतहोचुकीथी,लेकिनआर्यनकेकमरेकीबत्तीअबभीजलरहीथी।मेजपरसफेदकागजकाएकदस्तापड़ाथा,जोउतनाहीकोराथाजितनाआर्यनकादिमाग।आर्यनएकलेखकबननाचाहताथा।उसनेहफ्तोंसेएकशब्दभीनहींलिखाथा।वहउस'जादुईपल'काइंतज़ारकररहाथाजबउसकेदिमागमेंबिजलीकीतरहकोईमहानविचारकौंधेगाऔरवहएकहीरातमेंकालजयीउपन्यासलिखडालेगा।"जबतकप्रेरणानहींआएगी,मैंकैसेलिखसकताहूँ?"उसनेझुंझलाकरअपनीकलमफेंकदी।उसकेअंदरएकगहराडरबैठगयाथा—असफलताकाडर।वहडरकिशायदउसकेपासकहनेकोकुछहैहीनहीं।अगलीसुबह,आर्यनकेदादाजी,जोअपनीउम्रकेअस्सीवसंतदेखचुकेथे,उसकेपासआए।उन्होंनेआर्यनकेचेहरेपरछाईमायूसीकोपढ़लिया।"बेटा,क्याहुआ?तुम्हारीकलमआजभीसोरहीहै?"दादाजीनेमुस्कुरातेहुएपूछा।आर्यननेअपनीपरेशानीबताई, "दादाजी,प्रेरणाहीनहींमिलरही।बिनाप्रेरणाकेकामकरनातोबेजानशरीरमेंजानफूंकनेजैसाहै।"दादाजीनेउसकीमेजसेएककोरापन्नाउठायाऔरकहा, "आर्यन,रचनात्मककामकेवलप्रेरणाआनेकाइंतज़ारकरनेसेपूरानहींहोता।असलीकामतोतबपूराहोताहैजबहमहरदिनलगातारप्रयासकरतेरहतेहैं,फिरचाहेहमारामनकरेयानाकरे।"आर्यनकोयहबातअजीबलगी।उसेलगाकिबिनामनकेलिखनातोबसएकऔपचारिकताहोगी।लेकिनदादाजीनेउसेएकचुनौतीदी—"अगले२१दिनोंतक,रोजसुबह९बजेतुम्हेंअपनीमेजपरबैठनाहैऔरकमसेकम५००शब्दलिखनेहैं।चाहेवेशब्दकितनेहीबुरेक्योंनहों।"शुरुआतीकुछदिननर्कजैसेथे।आर्यनकामनभागनेकोकरताथा।उसेलगताथाकिवहकचरालिखरहाहै।लेकिनउसनेहारनहींमानी।धीरे-धीरेएकचमत्कारहोनेलगा।जैसे-जैसेवहलिखनाजारीरखता,उसका'लेखककाडर'गायबहोनेलगा।नियमितअभ्यासनेउसकेमनकेडरकोबाहरकरदियाथा।उसेअबमहानविचारोंकाइंतज़ारनहींथा;बल्किउसकेशब्दखुद-ब-खुदपन्नोंपरबहनेलगेथे।२१दिनबाद,आर्यनकेपासएककहानीकाढांचातैयारथा।वहसर्वश्रेष्ठनहींथी,लेकिनवह'अस्तित्व'मेंथी।उसदिनआर्यननेमहसूसकियाकिउसकाआत्मविश्वासबढ़नेलगाहै।वहअबप्रेरणाकागुलामनहींथा;वहअपनेअनुशासनकामालिकबनगयाथा।उसेसमझआगयाथाकिबार-बारबिनारुकेअपनाकामकरतेरहनाहीआत्मविश्वासकीअसलीचाबीहै।सीख:कामयाबीकाराजउसक्षणमेंनहींहैजबप्रेरणाहमेंछूतीहै,बल्किउनघंटोंमेंहैजबहमथकनेऔरमननहोनेकेबावजूदकामकरनाजारीरखतेहैं।निरंतरता(Consistency)हीवहजादुईतत्वहैजोसाधारणकोअसाधारणऔरडरकोआत्मविश्वासमेंबदलदेताहै।रचनात्मककार्यकेवलप्रेरणापरनिर्भरनहींहोते।हरदिनकालगातारअभ्यासमनकेडरकोखत्मकरताहैऔरआत्मविश्वासपैदाकरताहै।बिनारुकेअपनाकामकरतेरहें।