Paraye hue apne - 2 book and story is written by Ravnika in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Paraye hue apne - 2 is also popular in Women Focused in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. परायें हुए अपने - 2 Ravnika द्वारा हिंदी महिला विशेष 861 Downloads 2.1k Views Writen by Ravnika Category महिला विशेष पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण ( ससुराल में आगमन )कुसुम का ससुराल उसके घर से क़रीब 40 किलोमीटर की दूरी पर था जहाँ गाड़ी से पहुँचने में 1 घंटे से कम वक़्त ही लगता था। कुसुम अपने जेठ से घूँघट करती थी तो उन दोनों के बीच किसी तरह का कोई वार्तालाप नहीं हुआ। कुसुम के मन में बहुत सारे सवाल एक साथ आ रहे थे। उनमे से एक सवाल उसे बार- बार बहुत परेशान कर रहा था कि उसे लेने के लिए अचानक से उसके जेठ क्यू आये अगर आना ही था तो उसके पति Novels परायें हुए अपने दोपहर का समय था , घर की गैलरी में दो चारपाई बिछी हुई थी जिन पर दो बच्चे सो रहे थे जिसमे से एक की उम्र लगभग 4 महीने और दूसरे की लगभग 3 वर्ष होगी ।दोनों... More Likes This इल्म का नूर - 1 द्वारा Samreen Shaikh Shakti ke Shiv - 7 द्वारा sheetal ठुकराईन नयना देवी - 1 द्वारा Vandna Sharma पवित्र प्रेम या अभिशाप Season 2 - 2 द्वारा Sonam Brijwasi पिंजरे की उड़ान द्वारा deepanshi garg कुंवारी कन्या - 1 द्वारा nirala ji मंदिर में तुम - 3 द्वारा Sonam Brijwasi अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी