Footpathiya - 2 book and story is written by Dr. Suryapal Singh in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Footpathiya - 2 is also popular in Drama in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. फुटपाथिया - 2 Dr. Suryapal Singh द्वारा हिंदी नाटक Writen by Dr. Suryapal Singh Category नाटक पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण अंक दो(थाने के अन्दर का मैदान। एक मेज़ और दो कुर्सियाँ रखी हैं। वापट खुश होकर चहलकदमी करता है। मेज़ पर फाइल रखी है।)बापट- मिल गया चोर। दूसरे किसी को क्यों नहीं मिला? बापट सभी कैसे हो सकते हैं? नाचो गाओ, मिल गया चोर।(नेपथ्य से-कौन बापट?)बापट- जी सर। (अभिवादन करता है। )(नेपथ्य से-नाच रहा है क्या?)बापट- नहीं सर, कदम ताल कर रहा हूँ। मन कदमताल करना माँगता सर।(सावन्त आ जाता है। )बापट- (चहकते हुए) सर बीवी कहती है कंगन चाहिए।सावन्त- किस खुशी में बापट ?बापट- सर, चोर जो पकड़ा है।सावन्त- वह तो मेरी बेगम भी एक हीरे के हार की More Likes This पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 4 द्वारा Sonam Brijwasi फुटपाथिया - 1 द्वारा Dr. Suryapal Singh तनुदा का अपहरण - प्रस्तावना द्वारा Dr. Suryapal Singh नशा - 1 द्वारा Dr. Suryapal Singh उन्हें नींद नहीं आती-1-I द्वारा Dr. Suryapal Singh दरवाज़ा खुला था, पर उड़ने की हिम्मत मर चुकी थी - 1 द्वारा Praveen Kumrawat गीत गाने दो मुझे - 1 द्वारा Dr. Suryapal Singh अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी