Dialogue between Narada and Dharmaraja Yudhishthira book and story is written by Prithvi Nokwal in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Dialogue between Narada and Dharmaraja Yudhishthira is also popular in Short Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. नारद जी और धर्म राज युधिष्ठिर का संवाद Prithvi Nokwal द्वारा हिंदी लघुकथा 60 Downloads 165 Views Writen by Prithvi Nokwal Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण इन्द्रप्रस्थ की सभा उस दिन विशेष रूप से सजी हुई थी। राजसूय यज्ञ के बाद पांडवों का यश चारों दिशाओं में फैल चुका था। राजमहल के प्रांगण में सुवर्ण स्तंभ चमक रहे थे, सुगंधित धूप की महक वातावरण को पवित्र बना रही थी, और सभा में विद्वान ब्राह्मण, वीर योद्धा तथा मंत्रीगण विराजमान थे। परंतु उस वैभव के बीच धर्मराज युधिष्ठिर के हृदय में एक सूक्ष्म चिंता थी।राज्य विस्तार पा रहा था, प्रजा सुखी थी, किन्तु युधिष्ठिर जानते थे कि केवल वैभव ही आदर्श शासन का प्रमाण नहीं होता। राजा का धर्म केवल कर संग्रह और शत्रु-विजय तक सीमित नहीं More Likes This पहली मुलाक़ात - 1 द्वारा puja नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी