Conversation between Krishna and Gandhari after the war book and story is written by Prithvi Nokwal in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Conversation between Krishna and Gandhari after the war is also popular in Short Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. युद्ध के पश्चात कृष्ण और गान्धारी संवाद Prithvi Nokwal द्वारा हिंदी लघुकथा 899 1.2k Downloads 5.1k Views Writen by Prithvi Nokwal Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण पुत्र वियोग में तड़पती गांधारी जब कृष्ण को श्राप देने चली तब कृष्ण गांधारी से कहते हैंमाता मैं शोक ,मोह ,पीड़ा सबसे परे हूँ, न जीत में न हार में, न मान में , न अपमान में, न जीवन मे , न मृत्यु में, न सत्य में , न असत्य में, मैं किसी में नही बंधा हु माता है, काल , महाकाल सब मेरे दास हैं मैं उन्ही से अपने कार्य सिद्ध करवाता हूँ । हे माता युद्ध अवश्यम्भावी था ..जो चले गए हैं उन पर शोक मत करो बल्कि जो हैं उन्हें स्वीकारो माता ..!! वर्तमान को स्वीकारो माता, More Likes This Anime - 2 द्वारा shifa आखिरी कोशिश - 1 द्वारा Subhan Khan कहाँ खो गया वह होशियार अजय - 1 द्वारा Anamika ठुकराईन नयना देवी - 3 द्वारा Vandna Sharma लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 1 द्वारा Std Maurya दिल्ली जिमखाना क्लब द्वारा Devendra Kumar Fake Boyfriend real Feelings - 1 द्वारा Mawaskar Pratigya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी