" एकांश जी वो देखिये मेले के बिच में वो सुखा पेड़ दिख रहा है। सभी उसी पेड़ को देखने लगता है पर कुछ दिखाई नहीं देता। आलोक कहता है--->" पर वहाँ तो कुछ दिखाई नहीं देता। वर्शाली कहती हैं--->" ध्यान से देखीए एकांश जी पेड़ के उस सुखी टहनी पर जो सिधे ऊपर की और गई है। उसी पर देखीए कुम्भन की आंखें दिखाई देगी आपको। जो उस पैड़ पर">

श्रापित एक प्रेम कहानी - 36 CHIRANJIT TEWARY द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

Shrapit ek Prem Kahaani द्वारा  CHIRANJIT TEWARY in Hindi Novels
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थ...

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