" हाँ जी मैं यहां आपके लिए आई हूँ। एकांश जी आप वहां मेला में मत जाओ। वहां पर खतरा है। एकांश कहता है--->" तुम्हे ये सब कैसे पता , और हां वर्शाली मुझे पता है। वर्शाली कहती है---->" ये जानते हुए भी के कुंम्भन मुक्त हो चुका है और वो अब सबको मारने लगा है। तब भी आप वहाँ जाना चाहते हो और कुम्भन अब वो शांत नहीं होगा। क्योंकी राजनगर का रक्षा कवच अब नहीं रहा इसीलिए वो राजनगर के सभी मनुष्य को मारने लगा है और">

श्रापित एक प्रेम कहानी - 35 CHIRANJIT TEWARY द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

Shrapit ek Prem Kahaani द्वारा  CHIRANJIT TEWARY in Hindi Novels
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थ...

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