" तुझे पता नहीं के मेला में क्या चल रहा है। चतुर कहता है--->" हां यार फूटबॉल का मैच , क्यों तुझे पता नहीं । आलोक गुस्से से चतूर की और दैखता है चतुर कुछ जवाब नहीं देता और चुपचाप एकांश के साथ चौक पर से आलोक के साथ गाड़ी में बैठ जाता है।कुछ ही दैर में सभी मेला पँहुच जाता है। जहां पर सब का गांव वाले जोर सोर से स्वागत करता है। आलोक अपने जेब से एक">

श्रापित एक प्रेम कहानी - 32 CHIRANJIT TEWARY द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

Shrapit ek Prem Kahaani द्वारा  CHIRANJIT TEWARY in Hindi Novels
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थ...

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