friendship at the pier book and story is written by Gunjan Banshiwal in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. friendship at the pier is also popular in Travel stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. घाट की दोस्ती Gunjan Banshiwal द्वारा हिंदी यात्रा विशेष 375 612 Downloads 2k Views Writen by Gunjan Banshiwal Category यात्रा विशेष पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण जाड़े के दिन थे और संध्या काल का समय था।गंगा मैया बहुत शांत थी।कभी कभी कुछ लहरें घाट किनारे को छूती थी।अस्त होते हुए सूरज की सुनहरी किरणे उन लहरों को सुनहरे आंचल से ढक रही थी।घाट किनारे आरती की तैयारी हो रही थी।दीप जलाए जा रहे थे।कुछ ही समय बाद अंधेरा होने लगा ।जलते हुए दीपकों की तेज लौ घाट के किनारे को ओर भी खूबसूरत बन रखी थी।घाट की सीढ़ियों पर बैठ कर समीक्षा आन वाली लहरों को देख रही थी। घाट पर आरती के लिए भक्तों का आन बढ़ गया था।ओर देखते देखते सारे घाट पर भीड़ More Likes This अकेली दुनिया - 1 द्वारा prashant raghav कांचा - भाग 2 द्वारा Raj Phulware अंतरा - भाग 1 द्वारा Raj Phulware संस्कृति का पथिक - 1 द्वारा Deepak Bundela Arymoulik सत्रह बरस की तन्हा कहानी - 1 द्वारा yafshu love कलकत्ता यात्रा (प्रथम संस्मरण ) द्वारा नंदलाल मणि त्रिपाठी वक़्त की क़ैद: ऐत-बेनहद्दू की दीवारों में जो दबा है - 1 द्वारा Tiths Empire अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी