"यह द्वार बाहरी नहीं —यह भीतर है।इसे कोई शस्त्र नहीं, केवल स्वीकृति ही खोल सकती है।जो स्वयं को क्षमा नहीं कर पाए…वे मानवकुल में प्रवेश नहीं कर सकते।"तीनों — अर्जुन, अनाया और ओजस —मौन थे।तभी उनके सामने एक दिव्य दर्पण प्रकट हुआ —“आत्म-दर्पण” —जो हर उस छवि को दिखाता हैजिससे मनुष्य भागता है।--- अर्जुन का सामना – एक भूला पापदर्पण में अर्जुन ने खुद को देखा">

महाशक्ति - 45 Mehul Pasaya द्वारा पौराणिक कथा में हिंदी पीडीएफ

MAHAASHAKTI द्वारा  Mehul Pasaya in Hindi Novels
वाराणसी की तंग गलियों में अर्जुन का छोटा सा घर था, जहाँ वह अपनी पत्नी सुमन और छह साल के बेटे मोहन के साथ रहता था। एक साधारण मजदूर, जो सुबह काम पर जाता...

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