jalti hui parchi book and story is written by Vivek Singh in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. jalti hui parchi is also popular in Short Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. जलती हुई परछाई Vivek Singh द्वारा हिंदी लघुकथा 672 1k Downloads 3.1k Views Writen by Vivek Singh Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण ️ जलती हुई परछाईलेखक: विवेक सिंहरात के दो बज चुके थे। बाहर सुनसान सन्नाटा पसरा था। मीनाक्षी ने बिस्तर पर करवट बदली तो अचानक उसकी नज़र कमरे की दीवार पर पड़ी।हल्की सी रोशनी में उसे अपनी परछाई दिखी।लेकिन उसमें कुछ अजीब था—वो परछाई धीरे-धीरे हिल रही थी, जैसे उसमें कोई आग सुलग रही हो।मीनाक्षी ने घबराकर बल्ब जलाया। कमरे में सब कुछ ठीक था। उसने चैन की सांस ली, पर जैसे ही बल्ब की रोशनी परछाई पर पड़ी—उसके सिर से लेकर पैर तक झुरझुरी दौड़ गई।परछाई की पीठ से धुएं की पतली लकीर उठ रही थी। उसने हथेली से आंखें More Likes This हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 3 द्वारा Soni shakya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी