Jindagi ke rang hazar -- 16 book and story is written by किशनलाल शर्मा in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Jindagi ke rang hazar -- 16 is also popular in Anything in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story.
जिंदगी के रंग हजार - 16
Kishanlal Sharma
द्वारा
हिंदी कुछ भी
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विवरण
कोई न कोई ऐसा ही कारनामा करता रहता था।और अटक लड़ाई मोल लेना उसकी आदत थी।एनानी कि मोहन लाल से अच्छी दोस्ती थी।दोनों के स्वभाव में कोई साम्य नही था।फिर भी गहरे दोस्त थे।सर्विस में भी और रिटायरमेंट के बाद भी।किसी भी स्टेशन मास्टर या अपने इंचार्ज से उसकी पटती नही थी।हर एक से लड़ना।अगरकोई बात उसके विरुदह जये तो कोरट जाने में भी देर नही करता था।इसका नतीजा यह निकला कि मुझसे सीनियर होकर भी पदोन्नति में पीछे रह गया और मैं इंचार्ज बन गया।लेकिन हमारी दोस्ती कम नही हुई।ऑफिस मे भी और बाहर भी दोस्ती वैसी ही रही।आगरा
प्यार
मतलब
लगाव,आत्मीयता,प्रेम,जुड़ाव,खिंचाव,चाहत
अनेक शब्द है प्यार के लिए
प्यार के अनेक रूप है
माँ का बेटे से या बेटे का। माँ से प्यार
बाप का ब...
मतलब
लगाव,आत्मीयता,प्रेम,जुड़ाव,खिंचाव,चाहत
अनेक शब्द है प्यार के लिए
प्यार के अनेक रूप है
माँ का बेटे से या बेटे का। माँ से प्यार
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