Nirupama book and story is written by Kiran in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Nirupama is also popular in Short Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. निरुपमा माया द्वारा हिंदी लघुकथा 4.7k 2.7k Downloads 7.8k Views Writen by माया Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण दीदी को हम सब नीरू दीदी के नाम से बुलाते थे। निरुपमा तो सिर्फ पिताजी ही उनको कहा करते थे।वे कहते थे की बड़ा सकून है इस नाम में। दीदी भी एसी ही थी अपने नाम जैसी सकून दार। सबका खयाल रखने वाली,अम्मा के लिए सुबह की चाय दीदी ही बनाती थी।और अम्मा रोज़ चाय की प्याली हाथ में लेते हुए कहती "नीरू मेरी आदत मत बिगाड़,जब तू ससुराल चली जाएगी तो मेरा क्या हाल होगा" और दीदी हंसते हुए कहती की अम्मा मुझे कहीं पड़ोस में ही ब्याह देना, फिर में उम्रभर तुम्हारा और पिताजी का खयाल रख लूंगी। More Likes This पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-1 द्वारा Anil Kundal Childhood Friends - Episode 3 द्वारा unknownauther सजा.....बिना कसूर की - 1 द्वारा Soni shakya प्रेरणास्पंदन - 2-3 द्वारा Bhupendra Kuldeep मंजिले - भाग 46 द्वारा Neeraj Sharma हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया द्वारा Devendra Kumar डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 द्वारा Std Maurya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी