SUKHNA KE DUKH HUM SAB KE DUKH HAI book and story is written by Yashvant Kothari in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. SUKHNA KE DUKH HUM SAB KE DUKH HAI is also popular in Book Reviews in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story.
सुखना के दुःख हम सबके दुःख है
Yashvant Kothari
द्वारा
हिंदी पुस्तक समीक्षाएं
Four Stars
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विवरण
पाठकीय प्रतिक्रिया सुखना के दुःख हम सब के दुःख है . शशि कान्त सिंह का तीसरा व्यंग्य उपन्यास सुखना के नाम से आया है .इस से पहले उनके दो उपन्यास प्रजातंत्र के प्रेत व दीमक आये थे ,दोने पढ़े गए और सराहे गए .उनके व्यंग्य संकलन भी आये .वे भूगोल के अध्यापक हैं. परसा नामक गाँव में ,किसान नामक प्रजाति पाई जाती थी. इस वाक्य से यह रचना शुरू होती है . यह अकेला वाक्य ही बहुत कुछ कह देता है.ग्रामीण जनजीवन ,राजनिती ,हत्या बलात्कार ,पुलिस ,प्रशासन ,नेता ,और सबसे उपर आत्म हत्या .इस ताने बने के साथ यह रचना
पागल खाना पर पाठकीय प्रतिक्रिया याने समय का एक नपुंसक विद्रोह यशवंत कोठारी राजकमल ने ज्ञान चतुर्वेदी का पागलखाना छापा है.२७१...
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