भाव का फल book and story is written by Disha Jain in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. भाव का फल is also popular in Motivational Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. भाव का फल Disha Jain द्वारा हिंदी प्रेरक कथा 3.1k 2.3k Downloads 6.5k Views Writen by Disha Jain Category प्रेरक कथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण “मैं सर्वज्ञ तीर्थंकर हूँ। महावीर स्वामी खुद को तीर्थंकर कहते है पर वे एक ढोंगी है!”महावीर भगवान के शिष्य गोशाला ने, जिसने महावीर भगवान से ज्ञान प्राप्त किया था उसने ही इस तरह की बातें फैलाना शुरू किया। यह बात महावीर प्रभु के परम शिष्य गौतम स्वामी के कानों में भी पड़ी और उन्होंने महावीर प्रभु से पूछा कि, क्या यह बात सच है? गोशाला खुद को सर्वज्ञ कहता है ?वीतराग भगवान ने केवल इतना ही कहा, “यह बात सच नहीं है !”यह सुनकर गोशाला क्रोध से भड़क उठा। अपनी हकीकत सबके सामने आने के डर से वह बोला “अपने More Likes This शादी एक अभिशाप क्यों? - 2 द्वारा RACHNA ROY मौन नायक: कर्तव्य की अनकही जंग - 1 द्वारा Abhi Anand सफ़र की रंगत - 1 द्वारा Std Maurya Extra Material Affair.. - 1 द्वारा kalpita THE PLAYER - 1 द्वारा Avnish Sharma मेहनत की राह - मेरी अधूरी से पूरी होती कहानी - 1 द्वारा Soham उम्मीद की नई फसल द्वारा Khushbu kumari अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी