Tu Manzil Main Musafir book and story is written by swapnil pande in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Tu Manzil Main Musafir is also popular in Poems in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. तू मंज़िल मैं मुसाफिर swapnil pande द्वारा हिंदी कविता 1.4k 4.8k Downloads 11.3k Views Writen by swapnil pande Category कविता पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण एक रोज़ मंज़िल अपने राही से खुद मिलने जा पहुँची भटके हुए राही से नाराज़, मंज़िल ने कहा.... मैं मंज़िल तू मुसाफिर क्यूँ हो गया है काफ़िर जवाब दे मेरे सवालों का हिसाब दे बीते सालों का तू भीड़ में खोया हुआ तू ख्वाब में सोया हुआ तू रोज़ में जकड़ा हुआ तू मुक्त पर सिकुड़ा हुआ तेरी काठ क्यूँ झुकी सी है आवाज़ भी बुझी सी है आँखो का सूरज ढल गया कदमों का जैसे बल गया जो रोटी झट से पचती थी अब निवालों में ही फँसती हैं जो ज्वार सी निर्बाध थी वो More Likes This कविताओं का संग्रह- भाग 1 द्वारा prachi Gurjar चारपाई की व्यथा द्वारा Vandna Sharma शब्द और सत्य - भाग 1 द्वारा Shivraj Bhokare मन के अल्फाज - ख्वाहिश की कविताएं। - 1 द्वारा khwahishh श्रीरामचरितमानस - भाग 1 द्वारा Shivam Kumar Pandey सादगी के स्वर : लेखिका गीता कुमारी - 1 द्वारा Geeta Kumari जिंदगी संघर्ष से सुकून तक कविताएं - 1 द्वारा Kuldeep Singh अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी