श्री शिव रूद्राष्टकम Jatin Tyagi द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

श्री शिव रूद्राष्टकम

Jatin Tyagi द्वारा हिंदी आध्यात्मिक कथा

नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम् ।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम् ॥ निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।करालं महाकाल कालं कृपालुं, गुणागार संसार पारं नतोऽहम् ॥ तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा ...और पढ़े


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