Mid Day Meal - 8 book and story is written by Swatigrover in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Mid Day Meal - 8 is also popular in Fiction Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. मिड डे मील - 8 Swati Grover द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 1.6k 3k Downloads 7.5k Views Writen by Swati Grover Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण 8 अब हरिहर रोज़ कुछ न कुछ नया बनाकर अपने बच्चों के डिब्बे में देने लगा। केशव और मनोहर खुद भी खाते और अपने दोस्तों को भी खिलाते थे । हरिहर के हाथों में स्वाद हैं। बच्चे खुश होकर खाते थे । जब एक दिन केशव अपने डिब्बे का कौर अपने दोस्त शम्भू को खिला रहा था। तभी उसकी पालक की रोटी का टुकड़ा किसी ने उसके हाथ से लेकर अपने मुँह में डाल लिया। उसने सिर उठाकर देखा सामने रघु खड़ा था। वह ख़ुशी से हैरान हों गया। रघु तू भी यही पढ़ता हैं, पर कभी दिखा क्यों नहीं? केशव ने उसे गले लगाते हुए पूछा। बस अभी दाखिला हुआ है मेरा। माँ गुज़र गयी थीं। बापू ने नानी के पास भेज दिया था। वो खुद बीमार रहती थीं और मामी उन्हें ठीक से नहीं रखती थीं तो वह मुझे कैसे रख पाती। बस वापिस आ गया और बापू ने इस स्कूल में डलवा दिया। हाय ! तेरी माँ भी गुज़र गई, मेरी माँ भी गुज़र गई भाई। अब हम दोनों एक जैसे हों गए। केशव ने रघु का हाथ पकड़कर कहा। नहीं, हम दोनों एक जैसे नहीं हों सकते। तू कहना क्या चाहता हैं? यही कि मैं तुझसे एक कक्षा आगे हूँ। रघु ने हँसते हुए कहा। केशव भी हँसते हुए बोला, पर हमारी उम्र तो बराबर है, हाँ अगर तू फेल हों जाएगा फिर हम बराबर हों जाएंगे। केशव ने भी फ़टाक से ज़वाब दिया। तू नहीं सुधरेंगा याद है न, कितनी मस्ती करते थे , हम दोनों। तू स्कूल से खाना क्यों नहीं खाता? रघु ने सवाल Novels मिड डे मील हरिहर स्कूल की दीवार पर लिखा पढ़ रहा है ----'शिक्षा पर सबका अधिकार हैं' उसने यह बार-बार पढ़ा और अपने दोनों बेटे केशव और मनोहर... More Likes This I’m Not Fake, I’m Real - CHAPTER 1 द्वारा TEGICMATION किडनी का तोह्फ़ा - 1 द्वारा S Sinha वो आखिरी मुलाकात - 1 द्वारा veerraghawan Beyond the Pages - 1 द्वारा cat रूहों का सौदा - 1 द्वारा mamta लाल पत्थर का राज - भाग 1 द्वारा Anil singh जागती परछाई - 3 द्वारा Shivani Paswan अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी