पन्द्रह साल बाद रामानुज दरिया द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

पन्द्रह साल बाद

रामानुज दरिया मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी लघुकथा

रात के 11 बज रहे थे और गर्मी अपने चरम पर थी ओ भी उमस वाली गर्मी जो सबको उबलता हुआ देखना चाहती थी। वैसे तो थी हल्की चांदनी रात मगर अंधेरा चांद को अपनी आगोश में ले लेना ...और पढ़े


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