प्रतिशोध--भाग(३) Saroj Verma द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

प्रतिशोध--भाग(३)

Saroj Verma मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी प्रेम कथाएँ

रात्रि हुई सत्यकाम अपनी कुटिया में पड़े पुवाल से बने बिछावन पर लेट गया, परन्तु निद्रा उसके नेत्रों से कोसों दूर थी,उसकी कुटिया वैसे भी एकांत में सबसे अलग थी इसलिए कम लोग ही गुजरते थे उधर से, उसका ...और पढ़े

अन्य रसप्रद विकल्प