बावली बूच - सुनील कुमार राजीव तनेजा द्वारा पुस्तक समीक्षाएं में हिंदी पीडीएफ

बावली बूच - सुनील कुमार

राजीव तनेजा मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं

आमतौर पर किसी व्यंग्य कहानी या उपन्यास में समाज..सरकार..व्यक्ति अथवा व्यवस्था की ग़लतियों एवं कमियों को इस प्रकार से चुटीले अंदाज़ में उजागर किया जाता है कि सामने वाले तक बात भी पहुँच जाए और वह खिसियाने..कुनमुनाने.. बौखलाने..बगलें झाँकने ...और पढ़े

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