दिवाली रामानुज दरिया द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

दिवाली

रामानुज दरिया मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी लघुकथा

घना अंधेरा था, हवा के तेज सायं सायं चलने कीआवाज़ उस छोटी सी खिड़की से आ रही थी जिसपे अभी तक पल्ला नहीं लग पाया था। दीपक की रोशनी से पूरा घर रोशन था हर जगह पर , कोई ...और पढ़े


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