Desh aur Dharam ke parey book and story is written by Laiba Hasan in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Desh aur Dharam ke parey is also popular in Short Stories in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. देश और धर्म के परे Laiba Hasan द्वारा हिंदी लघुकथा 2.7k 2.7k Downloads 9.5k Views Writen by Laiba Hasan Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण करीब चार साल पहले की बात है मैं अपनी फैमिली के साथ अजमेर शरीफ से वापस लौट रही थी। बारह बजे अजमेर सियालदह ट्रेन आई और हम सब उसमें चढ़ गए। मम्मी ने टिकट पहले से ही हाथ में लिया हुआ था ताकि सीट ढूंढने में परेशानी ना हो। ये हमारी सीट हैं उन्होंने सामान नीचें रखा और मुझे बैठने का इशारा करते हुए कहा। मैं बोगी में इधर उधर देखने लगी। तभी टीटीई साहब आ गए मम्मी ने अपना और बाबा का टिकट पहले ही हाथ में लिया हुआ था उनके मांगने पर उन्हें थमा दिया और मेरा टिकट निकालने More Likes This पढ़ाकू द्वारा Vandna Sharma कोन्निचिवा: माय देसी लव - 1 द्वारा Kajal Soam किराए का घर द्वारा Vandna Sharma First Love - 1 द्वारा Sah Ankita जिस जीवन में तुम थे - 2 द्वारा SHREYA INDUSHREE तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 द्वारा Anil Kundal मेरा साहित्य लेखन द्वारा Rakesh Kumar Sharma अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी