hamre pas kitana kam samaya hai book and story is written by कृष्ण विहारी लाल पांडेय in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. hamre pas kitana kam samaya hai is also popular in Poems in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. हमारे पास कितना कम समय है कृष्ण विहारी लाल पांडेय द्वारा हिंदी कविता 1.3k 2.2k Downloads 5.9k Views Writen by कृष्ण विहारी लाल पांडेय Category कविता पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण केबीएल पांडे के गीत गीत हमारे पास कितना कम समय है डाल पर अब पक न पाते फल हमारे पास कितना कम समय है कौन मौसम के भरोसे बैठता है चाहतों के लिए पूरी उम्र कम है मंडियां संभावनाएं तौलती है स्वाद के बाजार का अपना नियम है मिट्ठूओ का वंश है भूखा यहां तक आगये दुर्भिक्ष भय है डाल पर अब पक न पाते फल हमारे पास कितना कम समय है हरे बनके सिर्फ कुछ विवरण बचे हैं भरी मठ में ली उदासी क्यारियों में आग की बातें हवा में उड़ रही हैं आज ठंडी हो रही जिन गाड़ियों में वह इससे क्या सारणिक लेगा यहां पर आरंभ से निस कर सकता है डाल पर अब पक न पाते फल हमारे पास कितना कम समय है वहां जाने क्या विवेचन चल रहा है सभी के वक्तव्य बेहद तीखे यहां सड़कों पर हजारों बिखरे रूट से वास्तविक है पूछने पर बस यही उत्तर सभी के यह गंभीर चिंता का विषय है डाल पर अब पक न पाते फल हमारे पास कितना कम समय है केबीएल पांडे के गीत कभी-कभी बस आते रहना यही बहुत है बंधु आजकल कभी-कभी बस आते रहना वैसे इस आपाधापी में किसको फुर्सत आए जाए! ब्याह बधाई शोक सांत्वना मिल जाते हैं छपे छपाए!! फिर भी कभी इधर से निकलो, हम पर दया दिखाते रहना! कभी-कभी बस आते रहना!! राजकाज कितना मुश्किल है छोटे लोग भला क्या जाने! त्याग तपस्या के स्वर्णाक्षर हम अज्ञानी क्या पहचाने !! किस निशान पर बटन दबाना मालिक हमें बताते रहना! कभी-कभी बस आते रहना भला आप भी क्या कर सकते जब सबका अपना नसीब है ! यह तो प्रभु की लीला ठहरी वह अमीर है वह गरीब है !! सभी चैनलों पर पूरे दिन हमें यही समझाते रहना! कभी-कभी बस आते रहना छोड़ो हम भी क्या ले बैठे दो कौड़ी छोटी बातें बातें छोटी, आखिर देश प्रेम भी कुछ है जब देखो तब रोटी रोटी!! करतल ध्वनि में आजादी का झंडा आप चलाते रहना कभी-कभी बस आते रहना ऐसा क्यों होता है ऐसा क्यों होता है कि More Likes This जिंदगी संघर्ष से सुकून तक कविताएं - 1 द्वारा Kuldeep Singh पर्यावरण पर गीत – हरा-भरा रखो ये जग सारा द्वारा Poonam Kumari My Shayari Book - 2 द्वारा Roshan baiplawat मेरे शब्द ( संग्रह ) द्वारा Apurv Adarsh स्याही के शब्द - 1 द्वारा Deepak Bundela Arymoulik अदृश्य त्याग अर्धांगिनी - 1 द्वारा archana ग़ज़ल - सहारा में चल के देखते हैं - प्रस्तावना द्वारा alka agrwal raj अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी