कुछ यादें फुरसत में Prabhas Bhola द्वारा કંઈપણ में हिंदी पीडीएफ

कुछ यादें फुरसत में

Prabhas Bhola द्वारा हिंदी કંઈપણ

क्या लिखू यार कुछ समझ नही आता,कल जो ख्वाब देखा था औ आज बिखरशा गया है... महफूज़ थी वो रात की सुबह जो तेरे इंतज़ार में कट रही थी..अब तो शुभह हो या शाम सब एक जैसा लगता ...और पढ़े

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