kanji aankhe book and story is written by Shubhra Varshney in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. kanji aankhe is also popular in Human Science in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story. कंजी आंखें Shubhra Varshney द्वारा हिंदी मानवीय विज्ञान 4.4k 3.5k Downloads 26.4k Views Writen by Shubhra Varshney Category मानवीय विज्ञान पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण कंजी आंखें "विभु तुमने स्कूल बैग लगा लिया? तुम्हें और तान्या को आज मैं ऑफिस जाते पर स्कूल छोड़ दूंगी।" टीवी कैबिनेट से पर्स उठाती गरिमा ने बेटे विभु को आवाज देते हुए कार की चाबी उठाई। "जी आंटी जी।" कमरे से आती विभु हल्की आवाज ने गरिमा को एक बार फिर बेचैन कर दिया। "आंटी जी?" उसकी नन्ही बेटी तान्या ने आश्चर्य से विभु की तरफ देखते हुए हवा में हाथ उठा दिए। गरिमा ने चिल्लाते हुए कहा," ऐसा कब तक चलेगा विभु? अब बस करो।" बदले मे विभु ने कुछ उत्तर नहीं दिया बस उसे देख कर अपनी More Likes This आधुनिकता ने निगले रिश्ते द्वारा Vandna Sharma वेदान्त 2.0 - भाग 41 द्वारा Vedanta Life Agyat Agyani राहें - 8 द्वारा shiromani mathur बचपन की अदालत - भाग 1 द्वारा Shekh Javed Ashraf मान्यताएं बदले और स्वस्थ रहे। द्वारा yeash shah Money Vs Me - Part 1 द्वारा fiza saifi जैन साध्वी का जीवन द्वारा Ashish अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी