जीवन - साथी Kusum द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

जीवन - साथी

Kusum द्वारा हिंदी लघुकथा

"उनकी सूनी-सूनी आंखें बार बार दरवाजे पर जाकर लौट आती।" मन मैं अजीब सी बैचैनी महसूस कर रहे थे। लेकिन उन्हें यह समझ नही आ रहा था, कि ऐसा क्यों हो रहा है। बहू जाते - जाते नाश्ता बनाकर ...और पढ़े

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