मानवता के डगर पे Shivraj Anand द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

मानवता के डगर पे

Shivraj Anand द्वारा हिंदी कविता

प्यारे तुम मुझे भी अपना लो ।गुमराह हूं कोई राह बता दो।युं ना छोडो एकाकी अभिमन्यु सा रण पे।मुझे भी साथले चलो मानवताकी डगर पे।।वहां बडे सतवादी है।सत्य -अहिंसाकेपुजारी हैं।।वे रावण के अत्याचार को मिटा देते हैं।हो गर हाहाकार ...और पढ़े

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