सलाखों के पीछे SHAMIM MERCHANT द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

सलाखों के पीछे

SHAMIM MERCHANT द्वारा हिंदी कविता

आज बोहोत दिनों बाद, सुकून से सोऊंगा,आज बड़े दिनों बाद, अच्छी नींद आएगी।जेल में वो सुकून कहां?सलाखों के पीछे वो आराम कहां?एक ऐसी बात के लिए अंदर हुआ था,जिसमे कुसूर मेरा था भी, और नहीं भी।वक़्त पर मूं न ...और पढ़े

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