कागा सब तन खाइयो कल्पना मनोरमा द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

कागा सब तन खाइयो

कल्पना मनोरमा द्वारा हिंदी लघुकथा

बेटे की शादी के बाद अपने-अपने नाती-पोते के जन्मोत्सव पर उषा और मंजुला फिर से मिल रही थीं ।अचानक आई महामारी ने दोनों को एक जगह कैद कर दिया था। लाख न चाहने पर समधिन जी जैसे भारी भरकम ...और पढ़े