कल्पना की उड़ान Er Bhargav Joshi द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

कल्पना की उड़ान

Er Bhargav Joshi द्वारा हिंदी कविता

ऐ वीरो जागो..घनघोर घटाए छाई हुई है ।दीप कहीं भी नजर ना आए ।।जागो ऐ वीरो जागो तुम फिर।आपदा हैबड़ी सीरत में आई।।बलिदान तुम्हारी है धरती मांगे।देखो भीषण एक रण है आगे।।लडो शत्रु का संहार करो तुम।मिट्टी अपनों का ...और पढ़े