किताब Dhruvin Mavani द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

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Dhruvin Mavani द्वारा हिंदी कविता

दुनिया सिर्फ कहती नही जनाब ,वो अक्सर कहती रहती है यहाँ लकड़े कहाँ ;सिर्फ़ लड़कियाँ ही तो सहती रहती है ...हम तुमसे अनजान थे अब तो वो समा ही बेहतर लगता है ,तेरा मुझे जानकर भी अनजान बनना मुझे ...और पढ़े


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