कविता "कभी सोचा न था" में कवि अकेलेपन, आत्मनिर्भरता, और जीवन के विभिन्न पहलुओं का अनुभव व्यक्त कर रहा है। 1. **अकेला हूँ**: कवि अपने अकेलेपन को महसूस करता है, चाहे वह श्मशान हो या तीर्थ, और अपनी स्थिति को धुंध और कोहरे में खोया हुआ मानता है। 2. **अपनी खिड़की**: कवि खुद की खिड़की खोलने की बात करता है, अपने आसमान को खोजने और उम्मीद के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। 3. **आत्मा कुछ तो करेगी**: आत्मा के काम करने की संभावना पर बल देते हुए, कवि खुशियों को संजोने और जीवन के विभिन्न सत्य को स्वीकार करने का संदेश देता है। 4. **अहाते में खड़ा**: कवि लोगों को देखकर खुशी महसूस करता है और बातचीत के माध्यम से संबंध बनाने की इच्छा व्यक्त करता है। 5. **एक दिन आता है**: जीवन के अंत और इच्छाओं के भिखारियों की स्थिति का वर्णन करते हुए, कवि रिश्तों के टूटने और ईश्वर के प्रकाश के माध्यम से आत्मा के परिवर्तन की बात करता है। 6. **बेटी इस घर से**: बेटी के दूसरे घर जाने को लेकर कवि उसके जाने के साथ अपने अंदर की खुशी और सुख का अनुभव करता है। यह कविता जीवन के जटिलता, संबंधों, और आत्मा के गहरे भावनाओं को चित्रित करती है। कभी सोचा न था - १ महेश रौतेला द्वारा हिंदी कविता 4.5k 4.4k Downloads 11k Views Writen by महेश रौतेला Category कविता पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण कभी सोचा न था१.अकेला हूँअकेला हूँशव में,श्मशान मेंशिव मेंतीर्थ में,तीर्थाटन मेंतथागत की भाँति,आँधी में,अँधियारे मेंधूप में,धूल मेंराह में,राह से आगे।अकेलाधुँध की भाँतिकोहरे की तरह,क्षीण आवाज में,सुब-शाम साउगता-अस्त होता,मन से गुनगुनाताक्षणिक विश्वास लिये।सच-झूठ को खींचतामनुष्य बनमौन हूँ। *******२.अपनी खिड़कीअपनी खिड़कीस्वयं ही खोलनी है,अपना आसमानखुद ही खोजना है।क्षितिजों की लाली मेंनहा-धोअपनी दहलीज परबार-बार आना है।धूप-छाँव के साथहँसते-रोतेगहरी उम्मीद में आ जाना है,बातों को बात समझबार-बाल पलटना है।अपनी खिड़कीस्वयं ही खोलउजाले तक झाँकना है। *******३.आत्मा कुछ तो करेगीआत्मा कुछ तो करेगीसार-संक्षेप बटोरकहीं तो मिलेगी,अपने बच्चों के लिएएक आसमान संजोयेगी,अपने ही जन्मदिन परढेर सारी खुशियों मेंलोट-पोट हो जायेगी,नदी के स्रोत Novels कभी सोचा न था कभी सोचा न था१.अकेला हूँअकेला हूँशव में,श्मशान मेंशिव मेंतीर्थ में,तीर्थाटन मेंतथागत की भाँति,आँधी में,अँधियारे मेंधूप में,धूल मेंराह में,राह से आगे।अ... More Likes This सावन के गीत द्वारा Vandna Sharma कविताओं का संग्रह- भाग 1 द्वारा prachi Gurjar चारपाई की व्यथा द्वारा Vandna Sharma शब्द और सत्य - भाग 1 द्वारा Shivraj Bhokare मन के अल्फाज - ख्वाहिश की कविताएं। - 1 द्वारा khwahishh श्रीरामचरितमानस - भाग 1 द्वारा Shivam Kumar Pandey सादगी के स्वर : लेखिका गीता कुमारी - 1 द्वारा Geeta Kumari अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी