कहानी में इवान, चिंटू और सुमति को डाकुओं के सरदार दिग्विजय द्वारा बंधक बना लिया जाता है। दिग्विजय उन तीनों को बताता है कि उनकी मांग पूरी होने तक वे सुरक्षित हैं, लेकिन अगर मांग न पूरी हुई तो उनका बुरा हाल होगा। इवान अपनी बुद्धिमानी दिखाते हुए दिग्विजय से सवाल करता है कि उनकी गलती क्या है और डाकुओं को नेता को पकड़ने की सलाह देता है। इस पर दिग्विजय उसे सही समझता है। इवान अपना परिचय देता है और बताता है कि वह एक न्यूज चैनल में काम करता है। चिंटू उसे चुप रहने के लिए कहता है, लेकिन इवान अपनी बात जारी रखता है। दिग्विजय अपने बेटे की गिरफ्तारी का कारण बताता है, जो ठेकेदारों से पैसे लूटने का आरोप लगा है, और चिंटू कानून की दृष्टि में यह गुनाह मानता है। चिंटू दिग्विजय से कहता है कि पुलिस गरीबों की मदद नहीं करती, जिस पर दिग्विजय गुस्से में प्रतिक्रिया देता है। दोनों के बीच पुलिस के प्रति विश्वास और अविश्वास को लेकर बहस होती है। कहानी में एक दिलचस्प मोड़ तब आता है जब इवान चिंटू से पूछता है कि क्या वह पुलिस में नौकरी करने वाला है। चिंटू - 21 V Dhruva द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 33.4k 3.9k Downloads 11.2k Views Writen by V Dhruva Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण सुबह से ज्यादा धूप नहीं निकली थी। इवान, चिंटू और सुमति को एक जगह बिठाया गया। कुछ देर बाद डाकुओं का सरदार खुद दिग्विजय बाहर आता है। देखने में वह बिलकुल डाकू जैसा ही दिखता था। काले रंग का कुर्ता, सफेद धोती, सर पे पगड़ी और बड़ी बड़ी मूंछें। इवान चिंटू के कान में कहता है- ये डाकू लोग हमेशा ऐसे ही कपड़े क्यों पहनते है? जींस- टी शर्ट नहीं पहन सकते? सरदार के सिवा के बाकी के लोग भी सिर्फ काले पेंट शर्ट में है। कोई कलरफुल कपड़े नहीं पहन सकते? चिंटू इवान के सामने गुस्से से देखता है Novels चिंटू मां मुझे भूख लगी है, हमे खाना कब मिलेगा? उसकी मां उसे अपनी गोद में बिठाकर कहती है जल्दी ही। पर ये तो आप कब से कह रही है। मुबंई के एक पॉश इ... More Likes This यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai In to the unknown द्वारा Parakshtha यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई द्वारा Ramesh Desai अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी