इस कहानी में, जमील नाम का एक व्यक्ति है जो गौ-ग्रास के लिए सोसायटी में आता है। लोग उसे देखकर भागते हैं और गाय को रोटी देने के लिए कहते हैं। जमील सोचता है कि उसके गाँव में लोग खुद ताजा रोटी निकालकर गाय को खिलाते थे, लेकिन अब ये गाड़ियाँ तेज संगीत के साथ आ रही हैं। सोसायटी में अधिकांश परिवार हिंदू हैं, और जमील अपने धर्म का ज़िक्र किए बिना काम करता है। वह "राम-राम जी" कहकर लोगों से मिलता है, जिससे वे मानसिक रूप से सहज होते हैं। जमील कबाड़ी का काम करता है और अपनी ताकतवर काया के बावजूद, वह खुद को एक साधारण व्यक्ति के रूप में पेश करने की कोशिश करता है। वह सोचता है कि ये नई गाड़ियाँ और उनका उद्देश्य क्या है, और उसे अपनी बस्ती में गायें कूड़े के ढेर में भूखी दिखाई देती हैं। कहानी में जमील की मनोस्थिति और उसके जीवन की जटिलताओं को दर्शाया गया है। तक्सीम - 3 Pragya Rohini द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां 1.2k 3.1k Downloads 9.4k Views Writen by Pragya Rohini Category सामाजिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण ‘‘ जय धरती मां जय गऊ माता’ के शब्दों पर हलचल सी मच जाती सोसायटी में- ‘‘अरे गौ-ग्रास वाला आ गया। भाग के जा और वो रात की रोटी दे आ।’’ ऊपर के माले से तुरंत भागकर न आ पाने वाली थुलथुल काया बीबीजी महरी को तुरंत दौड़ाती। आस-पास कई लोग बड़े नियम से अपना धर्म निभाने लगे थे। जमील सोच में पड़ जाता- हमारे गांव में तो पहली-पहली, ताजी रोटी निकालकर लोग खुद गाय को खिला आते थे। बिना किसी गाड़ी और भोंपू के शोर-शराबे के। पर आज आने वाली ये गाड़ियां तो तेज गानों के साथ गाय का गुण गाती फिर रही हैं। जमील को समझने में बड़ी दिक्कत होती कि गौ-ग्रास लेने का ये कैसा तरीका है। और अगर ऐसा करना ही है तो शांत तरीके से मांगा जाए यह दान। उसने आस-पास भी गौर किया तो पाया ये गाड़ियां तो अब हर सोसायटी-मोहल्ले में आ रही थीं। Novels तक्सीम ये शहर भी अजीब हैं न अनोखे? लाख गाली दे दिया करें रोज मैं और तू इन्हें पर इनके बिना तेरे-मेरे जैसों का कोई गुजारा है बोल? कितने साल बीत गए हम दोनों को... More Likes This मुक्त - भाग 13 द्वारा Neeraj Sharma मांई के मांई द्वारा Anant Dhish Aman हंटर - 2 द्वारा Ram Make अंधविश्वास - अंधेरा नहीं, सोच बदलो - 1 द्वारा Kaushik dave टूटता हुआ मन - भाग 1 द्वारा prem chand hembram अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3 द्वारा archana क्या सब ठीक है - 1 द्वारा Narayan Menariya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी