इस कहानी में एक व्यक्ति अपने जीवन के एक कठिन अनुभव को साझा करता है। प्रसव के दौरान उसकी पत्नी की स्थिति गंभीर हो जाती है और डॉक्टरों को उसे और उसकी संतानों में से किसी एक को बचाने का निर्णय लेने के लिए कहते हैं। वह अपनी संतानों को खो देता है और तीन दिन बाद पत्नी को अस्पताल से छुट्टी मिलती है। इस दुरुह समय में, वे दोनों अपने सपनों और प्रयासों की विफलता का सामना करते हैं, लेकिन वे हार नहीं मानते। पत्नी सुझाव देती है कि पति फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट, पुणे से डायरेक्शन का कोर्स करें, जबकि पति उसे कंप्यूटर साइंस में पीएचडी करने के लिए प्रोत्साहित करता है। हालांकि, पति को पता चलता है कि पुणे जाकर पढ़ाई करने का मतलब उसकी नौकरी छोड़ना है, और परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए वह यह निर्णय नहीं ले पाता। कहानी यह दर्शाती है कि कठिनाइयों के बावजूद, वे अपने भविष्य के लिए नए विचारों पर विचार करते हैं और एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। प्रकृति मैम- उगा नहीं चंद्रमा Prabodh Kumar Govil द्वारा हिंदी जीवनी 2.1k 3.7k Downloads 9.3k Views Writen by Prabodh Kumar Govil Category जीवनी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण 8. उगा नहीं चंद्रमाजो हुआ, उसका कसूरवार मैं ही रहा।प्रसव के दौरान रक्तचाप बेतहाशा बढ़ गया। आनन- फानन में सिजेरियन डिलीवरी का निर्णय लिया गया। किन्तु कुदरत अपना क्रोध हमारे नसीबों पर छिड़क चुकी थी।डॉक्टरों के दल द्वारा मुझसे पूछा गया कि मां और संतान में से किसी एक को ही बचाया जा सकेगा, मेरी रज़ा क्या है ???संतानें दो थीं। मेरा जवाब सुनने के बाद वो दोनों इस धरा पर किसी एलियन की तरह जिस जहां से आए थे, उसी में लौट गए।तीन दिन के बाद ढेर सारी हिदायतों के साथ मेरी पत्नी को हस्पताल से छुट्टी दे दी Novels प्रकृति मैम अरे सर, रुटना रुटना ...अविनाश दौड़ता-चिल्लाता आया। -क्या हुआ? मैं पीछे देख कर चौंका। -सर, टन्सेसन मिलेडा। -अरे कन्सेशन ऐसे नहीं मिलता। मैंने लापरवाह... More Likes This सम्राट अशोक : तलवार, युद्ध और धर्म - 1 द्वारा Rishav raj मैं दादा-दादी की लाड़ली - 1 द्वारा sapna यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (2) द्वारा Ramesh Desai नकल से कहीं क्रान्ति नहीं हुई - 1 द्वारा Dr. Suryapal Singh अवसान विहीन अरुणेश द्वारा नंदलाल मणि त्रिपाठी प्रेमानंद जी : राधा-कृष्ण लीला के रसिक साधक - 1 द्वारा mood Writer जगमोहन शर्मा (अविस्मरणीय) द्वारा नंदलाल मणि त्रिपाठी अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी