कहानी "अनुराधा" में विजय, जो एक विलायती लिबास में है, बाबू परिवार के सदर मकान में पहुंचता है। उसके साथ कुछ अनुयायी और विनोद घोष हैं। विजय ने अपने बेटे को साथ लाया है ताकि वह इस जायदाद पर दखल देने में साहसी बन सके, हालांकि विनोद उसे समझाता है कि अनुराधा एक अकेली महिला है और उसे हरगिज नहीं हराया जा सकता। विजय ने सुना है कि अनुराधा का स्वभाव ठीक नहीं है और वह लोगों को फटकने की क्षमता रखती है। विजय मकान के जीर्ण-शीर्ण हालत को देखता है, जिसमें कबूतरों और चिड़ियों ने आश्रय बना रखा है। विनोद राधा जीजी को सूचित करता है कि छोटे बाबू बाहर खड़े हैं। अनुराधा रसोई में है और उसे आने में थोड़ी देर लगने वाली है। वह विनोद से कहती है कि वह बाबू को बैठने के लिए कह दे, लेकिन विनोद की आवाज में संकोच है। आखिरकार, बाहर दरी बिछाई गई लेकिन कोई भी उस पर नहीं बैठा। कहानी में सामाजिक स्थिति और पुरुष-प्रधानता के तत्वों को दर्शाया गया है। अनुराधा - 2 Sarat Chandra Chattopadhyay द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां 38.3k 12.1k Downloads 17.6k Views Writen by Sarat Chandra Chattopadhyay Category सामाजिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण विजय शुद्ध विलायती लिबास पहने, सिर पर हैट, मुंह में चुरुट दबाए और जेब में चेरी की घड़ी घुमाता हुआ बाबू परिवार के सदर मकान में पहुंचा। साथ में दो मिर्जापुरी लठैत दरबान, कुछ अनुयायी प्रजा, विनोद घोष और पुत्र कुमार। जायदाद पर दखल करने में हालाकि झगड़े फसाद का भय है, फिर भी लड़के को लड्डु गोपाल बना देने के बयाज मजबूत और साहसी बनाने के लिए यह बहुत बड़ी शिक्षा होगी, इसलिए वह लड़के को भी साथ लाया है, लेकिन विनोद बराबर भरोसा देता रहा है कि अनुराधा अकेली और अततः नारी ही ठहरी, वह जोर-जबर्दस्ती से हरगिज नहीं जीत सकती। फिर भी जब रिवाल्वर पाक है तो साथ ले लेना ही अच्छा है। Novels अनुराधा लड़की के विवाह योग्य आयु होने के सम्बन्ध में जितना भी झूठ बोला जा सकता है, उतना झूठ बोलने के बाद भी उसकी सीमा का अतिक्रमण किया जा चुका है और अब तो विव... More Likes This कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 1 द्वारा miss k सूर्यकुल का सूर्यास्त - 1 द्वारा ALLA NOOR KHAN मुक्त - भाग 13 द्वारा Neeraj Sharma मांई के मांई द्वारा Anant Dhish Aman हंटर - 2 द्वारा Ram Make अंधविश्वास - अंधेरा नहीं, सोच बदलो - 1 द्वारा Kaushik dave टूटता हुआ मन - भाग 1 द्वारा prem chand hembram अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी