"डोर – रिश्तों का बंधन" कहानी में नयना की यात्रा को दर्शाया गया है, जो विवेक के साथ अपने पांच साल के विवाह के बाद तलाक लेकर स्वतंत्रता की तलाश में है। नयना ने विवेक के घर को छोड़ा और कानूनी रूप से भी उससे अलग हो गई। वह सोचती है कि इस शादी से उसे क्या मिला, जब उसकी खुशी कम और समझौते अधिक थे। समाज में कई लोग उसे दोषी मानते हैं, जबकि उसका परिवार उसके साथ खड़ा है। तलाक के कारण विवेक को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। नयना ने घरेलू हिंसा का झूठा आरोप लगाने से भी मना कर दिया, क्योंकि विवेक ने उसे केवल मानसिक चोट पहुंचाई थी। वह सुकून की तलाश में है, प्रतिशोध की नहीं, और अंततः आपसी सहमति से तलाक का निर्णय लिया। नयना ने कभी भी ऐलीमनी नहीं लेना चाहा, क्योंकि वह अपनी शादी के पांच साल की कीमत केवल पैसों में नहीं आंकेगी। कहानी में नयना का परिवार और मीनू, उसकी देवरानी, के साथ के रिश्ते की भी चर्चा है। नयना ने मीनू को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ब्यूटिशियन बनने की सलाह दी और उसका पार्लर खुलवाने में मदद की, यह मानते हुए कि महिलाओं का आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। नयना की सोच ने उसे विवेक के घर छोड़ने की हिम्मत दी, जिससे यह कहानी आत्म-सम्मान और स्वतंत्रता के महत्व को उजागर करती है। डोर – रिश्तों का बंधन - 7 Ankita Bhargava द्वारा हिंदी प्रेम कथाएँ 8.2k 4.9k Downloads 11.1k Views Writen by Ankita Bhargava Category प्रेम कथाएँ पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण दो साल होने आए थे नयना को विवेक का घर छोड़े, अब तो वह कानूनी रूप से भी विवेक से अलग हो चुकी है। कभी कभी वह सोचने लगती क्या मिला उसे इस शादी से। पांच साल का वैवाहिक जीवन जिसमें खुशी कम और समझौते ज्यादा आए उसके हिस्से और बिना किसी कसूर तलाकशुदा का तमगा। उसका परिवार जरूर इस मुश्किल वक्त में उसके साथ खड़ा रहा पर समाज में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं थी जो उसे ही कसूरवार मानते थे। कुछ तो ऐसे भी थे जो सहानुभूति दिखाने की आड़ में उसका दुख कुरेद कर चल देते थे। इस तलाक की कीमत तो विवेक ने भी काफी बड़ी चुकाई थी, उसने ना सिर्फ प्रकाश खारीवालजी का वरद हस्त खोया था, बल्कि नयना की वकील ने नयना के लिए ऐलीमनी के रूप में जिस रकम की मांग की उसे चुकाने में उसकी सारी जमा पूंजी खर्च हो गई। Novels डोर – रिश्तों का बंधन ढ़ोलकी की थाप पर जैसे ही गीत शुरु हुआ सुरेश की आंखों के कोर भीग गए। कैसा माहौल होता है बेटी की शादी में। घर में रौनक भी होती है और खुशियाँ भी पर दिल मे... More Likes This वेलेंटाइन- डे, एक अधूरी शुरुआत - 1 द्वारा vikram kori BL Live story द्वारा PAYAL PARDHI The Monster Who Love Me - 1 द्वारा sheetal Kharwar मेरी हो तुम - 1 द्वारा Pooja Singh श्रापित एक प्रेम कहानी - 38 द्वारा CHIRANJIT TEWARY When Stranger Fall in love - 1 द्वारा silent Shivani उभरा इश्क - 1 द्वारा Sonali Rawat अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी