कहानी "पगडंडी" में दो मुख्य पात्र हैं: उमंग और नीतू। उमंग एक एम. कॉम. फाइनल का छात्र है, जबकि नीतू फर्स्ट ईयर की छात्रा है। दोनों का घर एक-दूसरे के पास है, और उनका आपस में एक खास रिश्ता है, जो अक्सर छोटे-छोटे बहानों से चलता है। कहानी की शुरुआत उस क्षण से होती है जब उमंग नीतू से स्कूटर की चाबी लेता है, और नीतू के सुडोल नाखून उसके हाथ को छूते हैं, जिससे उसे एक झटका लगता है। नीतू उमंग से अपने स्कूटर के खराब होने की शिकायत करती है, और यह संवाद उनके बीच की निकटता को दर्शाता है। इसके बाद, कहानी में नीतू के प्रति उमंग की आकर्षण की भावना प्रकट होती है। वह उसे स्मार्ट और आकर्षक पाता है, और उसके कपड़ों और स्टाइल को लेकर विचार करता है। मानसून के दौरान, जब नीतू उमंग के घर पर खाना लेकर आती है, तब उमंग उसे और भी आकर्षक पाता है। उमंग अपने कमरे में जाकर पुराने सामान के बीच समय बिताता है, और वह अक्सर नीतू के लिए गाने सुनता है। नीतू उसके गानों को पहचान जाती है और किसी न किसी बहाने उससे मिलने आती है। उमंग की सोच में नीतू का स्वरूप एक सजने-संवरने वाली लड़की के रूप में है, जो किताबें पढ़ने में कम रुचि रखती है। कहानी में उमंग और नीतू के बीच की जटिल भावनाओं और आकर्षण को सुंदरता से दर्शाया गया है, जो युवा प्रेम और दोस्ती के पहलुओं को उजागर करता है। पगडंडी. Pritpal Kaur द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां 16.3k 3.8k Downloads 20.1k Views Writen by Pritpal Kaur Category सामाजिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण हंस में प्रकाशित स्कूटर की चाबी पकड़ाते समय उसकी अंगुलिओं के बढ़े हुए सुडोल नाखून उसकी हथेली पर छू गए थे. झटका सा लगा जैसे. सारा बदन झनझना उठा. भीतर तक काँप गया. नीचे झुके उसके चेहरे को देख रहा था.... गोरा रंग, घुंघराले चमकते ताज़ा शैम्पू किये महकते बाल, माथे के आस-पास की हल्की पतली लटें चेहरे और आँखों पर झूल झूल जातीं. कानों में नए फैशन की बालियाँ. गले में इमीटेशन गर्नेट्स..... यहीं तक देखा था कि उसकी अँगुलियों के नाखून उसकी हथेली पर छू गए और वो झनझना उठा था. उमंग भैया ... देखिये तो क्या हो गया है? कल शाम को स्कूटर स्टार्ट ही नहीं हुआ. अभी कॉलेज जाना है..... नाम के साथ लगा भैया शब्द समझा गया कि आस-पास है. अकेले में नीतू उसे सिर्फ उमंग कहती है और शायद इसी बहाने बहुत कुछ कहना-सुनना हो जाता है. लेकिन फर्स्ट इयर के नीतू और एम्. कॉम. फाइनल के उमंग के बीच ऐसी-वैसी कोई बात नहीं है. More Likes This बांसुरी की धुन - भाग 1 द्वारा prem chand hembram राहें - 9 द्वारा shiromani mathur एक घरवाली, चार बाहरवाली द्वारा sukhvinder Singh Rai धर्मराज की सभा - 1 द्वारा prem chand hembram खोटा सिक्का - 1 द्वारा prem chand hembram कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 1 द्वारा miss k सूर्यकुल का सूर्यास्त - 1 द्वारा ALLA NOOR KHAN अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी