इस कहानी में एक मां अपने बच्चों के बारे में बाबा से सवाल करती है। वह तीन साल से अपने बच्चों से दूर है और उनकी चिंता करती है। बाबा उसे समझाते हैं कि उसे रोने की बजाय आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन मां अपने बच्चों के अकेलेपन के अहसास से दुखी है। वह कहती है कि उसके पति चला गया है और वह बच्चों के बिना नहीं जा सकती। बाबा उसे बताते हैं कि उसका पति नया जन्म ले चुका है और वह यहीं पर रुक गई है। मां अपने बच्चों के लिए चिंतित है, जबकि बाबा उसे बताने की कोशिश करते हैं कि यह सब विधि का विधान है। इसके बीच में उनकी बातचीत में अपराधबोध और विवशता की भावनाएं भी झलकती हैं। कहानी में मां की पीड़ा और बाबा का तटस्थ दृष्टिकोण दिखाया गया है। बाबा मेरे बच्चे कैसे हैं ? Upasna Siag द्वारा हिंदी लघुकथा 16.8k 2.7k Downloads 10.3k Views Writen by Upasna Siag Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण बाबा, मेरे बच्चे कैसे हैं ? ............. बोलो बाबा ! हर बार मेरी कही अनसुनी कर देते हो ...., अब तो बोलो ! ................ बाबा ! ................ मैं क्या कहूँ पुत्री । क्यों नहीं कह सकते हैं ? तीन साल हो गए हैं अपने बच्चों से बिछुड़े हुए ..... ना जाने किस हाल में होंगे । More Likes This अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar चुन्नू और मुन्नू - एक खट्टी-मीठी दोस्ती ( भाग -1) द्वारा Vishakha Pareek जग्गू - द डिटैक्टिव - 1 द्वारा Rakesh Kumar Sharma आज्ञा द्वारा Rajeev kumar पता बताते दिन द्वारा महेश रौतेला तुम हो तो सब कुछ है - भाग 1 द्वारा Ankit Khatri मेरी जिंदगी का सफर 1 द्वारा Ankit Khatri अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी