गौरी की बेटी नीलू की हरकतें तेजी से बदल रही थीं, लेकिन गौरी को इसकी जानकारी नहीं थी। उसकी सहेलियां उसे चेतावनी देती थीं कि नीलू अब पलटने लगी होगी। जब गौरी ने अपनी सास से कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी लें, तो सास ने उसे डांटकर कहा कि वह अब काम करने की उम्र में नहीं है। गौरी चाहती थी कि वह अपनी भावनाएं व्यक्त करे, लेकिन चुप रह जाती। नीलू अपनी दादी के बेहद करीब थी और मां से ज्यादा दादी को पहचानती थी। जब गौरी उसे गोद में उठाती, तो नीलू दादी की ओर हाथ फैला कर रोने लगती। दादी का यह कहना गौरी को जलाता था कि नीलू उसे ज्यादा प्यार करती है। गौरी को यह महसूस होता था कि दादी ने उसकी बच्ची को अघोषित रूप से अपने पास ले लिया है। धीरे-धीरे गौरी ने परिस्थितियों से समझौता कर लिया, क्योंकि उसके पति इसे दादी का प्यार मानते थे। गौरी की ससुराल में एक सामंती माहौल था, जहां उसकी सास परिवार की सारी जिम्मेदारियों को संभालती थीं। सास का व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली था, और वह अपनी उम्र के बावजूद आकर्षक और आत्मविश्वासी थीं। गौरी की स्थिति को कोई नहीं समझता था, और वह एक मां के दिल की पीड़ा को सहन करती रही। बड़ी बाई साब - 2 vandana A dubey द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 69.8k 19.8k Downloads 28k Views Writen by vandana A dubey Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण नीलू कब मुस्कुराने लगी, कब करवट लेने लगी, कब पलटने लगी, गौरी को पता ही नहीं. उसकी सहेलियां पूछतीं-”बिटिया अब तो पलटने लगी होगी न गौरी? खूब ध्यान रखना अब वरना बिस्तर से नीचे गिर जायेगी.’ गौरी क्या बताती? हंस के हां-हां कह देती. जब भी उसने सास से कहा कि वे अपना काम करें, बच्ची को दे दें सम्भालने के लिये’ तब-तब सास ने उसे झिड़क दिया-’ मुझे क्या काम करने हैं भला? अब काम करने की उमर है मेरी? तुम सम्भाल तो रही कामकाज. मुझे बच्ची सम्भालने दो. काम-वाम न होता मुझसे.’ गौरी का मन तो होता कि Novels बड़ी बाई साब “ ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते !!.......नीचे मंडप में पंडित जी कलश स्थापना कर रहे थे. खिड़की से सिर... More Likes This सुनहरा फलक - 1 द्वारा Digvijay Singh Rathore खलनायिका के रूप में पुनर्जन्म - 1 द्वारा Fictional world THE UNTOLD CHAPTER - 1 द्वारा Neha Banchhor कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 1 द्वारा miss k त्रिवेणी: एक आदर्श बहू से बेकार बहू बनने तक का सफर - 1 द्वारा Triveni chakrdhari अनाथ - अध्याय 1 द्वारा Dev Kumar Rawat गायब - एक रात की कहानी - 1 द्वारा Patel Lay अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी