इस कहानी में अभिषेक अपनी माँ के प्रति गहरी नाराजगी और प्रतिशोध रखते हैं। वह अपने बचपन की तस्वीरों को देखते हुए अपनी माँ की यादों को ताजा करते हैं, जो उनकी ज़िंदगी से चली गई थीं। अभिषेक की माँ ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए उन्हें छोड़ दिया था, और अब वह अपने पिता की शादी की खुशी को देख रहे हैं, जबकि उन्हें अपने मातृत्व का अनुभव नहीं मिल पाया। अभिषेक अपनी माँ की कमी और अपने बचपन को लेकर दुखी हैं। वह अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं और अपनी माँ की तस्वीर की ओर इशारा करते हैं, जिससे उन्हें अपने बचपन की यादें ताज़ा होती हैं। कहानी में संध्या का भी दर्द है, जो अपने बच्चों के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन वह खुद को अभिषेक के साथ जुड़ने में असमर्थ पाती हैं। अभिषेक के शब्दों में गुस्सा और दुःख है, और वह संध्या से दूर रहने की कोशिश कर रहे हैं। अंत में, संध्या अकेली बैठी रहती हैं, अपने विचारों में खोई हुई, जबकि अभिषेक उन्हें खाने के लिए प्रेरित करने की कोशिश करते हैं। कहानी का माहौल भावनात्मक है, जिसमें पारिवारिक संबंधों और मातृत्व की जटिलता का चित्रण किया गया है। अब लौट चले - 6 Deepak Bundela Arymoulik द्वारा हिंदी क्लासिक कहानियां 8.1k 4.9k Downloads 10.2k Views Writen by Deepak Bundela Arymoulik Category क्लासिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण अब लौट चले -6अभिषेक का हर शब्द में मेरे प्रति प्रतिशोध था... ये देखिये मेरे पिताजी और मेरी माँ... कितने खुश है एक नए जीवन की शुरुआत करने के लिए.. लेकिन शायद मेरे पिता के जीवन में वैवाहिक सुख नसीब में नहीं था... वो थोड़ा चुप सा हो गया था बोलते बोलते मैंने उसे संतभावना देंने के लिए अपना हाथ उठाया ही था कि उसने चिढ़ते हुए कहा था... मुझें हाथ मत लगाना, आपकी कोई सहानुभूति नहीं चाहिए... और वो एल्वम के पन्ना पलटते - पलटते बोलता जा रहा... इतने सालों की उसके मन में भरी खीज शायद अब निकल रहीं थी 8-10 पन्ने Novels अब लौट चले अब लौट चले आज मुझें ऐसा लग रहा था कि मै सच में आज़ाद हूं, सारी दुनियां आज पहली बार मुझें नई लग रहीं थी, सब कुछ नया और सुकून से भरा गर्त के अँधेरे को ची... More Likes This अशोक का परिवर्तन - युद्ध से करुणा तक - 1-2 द्वारा Skp devine जिस जीवन में तुम थे - 5 द्वारा SHREYA INDUSHREE गांव की वह शाम द्वारा Akanksha Dubey सफ़ेद शॉल - 1 द्वारा SHREYA INDUSHREE नम आँखे - 5 द्वारा Nandini Agarwal Apne Kalam Sein अम्मा - 3 द्वारा Nandini Agarwal Apne Kalam Sein गोदान : शब्दार्थ सहित - भाग 1 द्वारा Shivam Kumar Pandey अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी