यह कहानी मौलाना साहब और पंडित जी के बीच की बातचीत पर केंद्रित है। मौलाना साहब स्कूल से लौटते समय पंडित जी के घर रुकते हैं यह जानने के लिए कि पंडित जी का हाल-चाल कैसा है। उन्हें चिंता होती है कि शायद पंडित जी अपने मेहमान बरन के कारण परेशानी में हैं। जब मौलाना साहब दरवाज़े पर खड़े होते हैं, तो बरन खिड़की से झाँकता है लेकिन दरवाज़ा नहीं खोलता। अंततः मौलाना साहब घंटी बजाते हैं और पंडित जी उन्हें देखकर अंदर बुलाते हैं। बातचीत के दौरान मौलाना साहब पंडित जी से बरन के हाल-चाल पूछते हैं, जिस पर पंडित जी थोड़ी हंसी में जवाब देते हैं। कहानी में एक मोड़ तब आता है जब आँगन में बीड़ी का टुकड़ा गिरता है और मौलाना साहब इसे देखकर दुखी होते हैं। वह पंडित जी से पूछते हैं कि वह यह सब कैसे सहन कर रहे हैं और बरन को समझाने की बात करते हैं। पंडित जी इस पर कहते हैं कि यह केवल कुछ दिनों की बात है और वह इसे सहन कर सकते हैं। मौलाना साहब का कहना है कि मेहमान का मतलब यह नहीं है कि वह परेशानी का कारण बने। कहानी समाज के विभिन्न पहलुओं, मेहमाननवाजी और सहिष्णुता को दर्शाती है। इंद्रधनुष सतरंगा - 13 Mohd Arshad Khan द्वारा हिंदी प्रेरक कथा 2k 2.9k Downloads 8.3k Views Writen by Mohd Arshad Khan Category प्रेरक कथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण अगले दिन स्कूल से लौटते समय मौलाना साहब पंडित जी के दरवाज़े रुक गए। सोचा पंडित जी के हाल-चाल लेता चलें। मन में यह भी था कि पंडित जी संकोची प्रवृत्ति के आदमी हैं, कहीं बरन के कारण परेशान न हो रहे हों। चलकर देख-भाल भी लें। मौलाना साहब का स्कूटर रुका तो बरन ने खिड़की खोलकर झाँका। दोनों की नज़रें मिलीं। उसने फिर खिड़की बंद कर ली। मौलाना साहब धूप में खड़े दरवाज़ा खुलने का इंतज़ार करते रहे। उन्होंने दरवाज़ा खटखटाया नहीं। सोचा था बरन सूचना दे ही देगा, या ख़ुद आकर दरवाज़ा खोल देगा। पर जब खड़े-खड़े पाँच मिनट हो गए तो उन्होंने बढ़कर घंटी बजा दी। Novels इंद्रधनुष सतरंगा हिलमिल मुहल्ले को लोग अजायब घर कहते हैं। इसलिए कि यहाँ जितने घर हैं, उतनी तरह के लोग हैं। अलग पहनावे, अलग खान-पान, अलग संस्कार, अलग बोली-बानी और अलग ध... More Likes This असंभव को संभव बनाने वाले: गॉगिन्स की कहानी - 1 द्वारा Nimesh Gavit नम आँखे - 2 द्वारा Nandini Agarwal Apne Kalam Sein आजादी - 1 द्वारा Kuldeep singh सादगी के स्वर : लेखिका गीता कुमारी - 2 द्वारा Geeta Kumari ट्रिपलेट्स भाग 2 द्वारा Raj Phulware जहाँ से खुद को पाया - 1 द्वारा vikram kori 8:30 pm शांति एक्सप्रेस - 1 द्वारा Bhumika Gadhvi अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी