मृत्युंजय सिंह, जो 21 साल के हैं, ने एडवर्टाइजमेंट टेक्नोलॉजी से संबंधित स्टार्टअप Adjuction.com की स्थापना की और 20 दिन में 10 लाख की फंडिंग प्राप्त की। मृत्युंजय के पिता एक छोटे किसान हैं, बड़े भाई प्राइवेट जॉब करते हैं और माँ हाउस वाइफ हैं। उन्होंने अपनी कंपनी की शुरुआत 1,800 रुपये का कर्ज लेकर की थी। मृत्युंजय ने इंटरनेट जगत में अपनी मेहनत से पहचान बनाई। वह एक एथिकल हैकर हैं और AI Technology पर आधारित एक वेबसाइट बनाई। उन्होंने गूगल एडसेंस की समस्या के कारण एक नया प्लेटफॉर्म बनाने का सोचा, जिससे कंपनियों को विज्ञापन देने और पब्लिशर्स को पैसे कमाने का मौका मिले। उनकी वेबसाइट पर बड़ी कंपनियों ने विज्ञापन देना शुरू किया और 20 दिन में ही उन्हें 20 लाख की फंडिंग मिली। मृत्युंजय सिंह 'स्टार्टअप यात्रा यूपी एडिशन 2017' के विजेता रह चुके हैं और उनके दूसरे स्टार्टअप को आईआईएम कोलकाता ने 3000 सबसे बेहतरीन स्टार्टअप में स्थान दिया है। मृत्युंजय ने बिना कोडिंग और प्रोग्रामिंग की विशेष जानकारी के भी अपनी क्षमता साबित की है। वह IIT BHU से एक और स्टार्टअप का संचालन कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने एक फास्ट और सिक्योर मोबाइल ब्राउज़र बनाया है। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें कारोबारी सफलता दिलाई है। पिता से 1,800 रुपये उधार लेकर शुरू की कंपनी, लाखों का टर्नओवर Mrityunjay Singh द्वारा हिंदी जीवनी 14.2k 2.6k Downloads 10.6k Views Writen by Mrityunjay Singh Category जीवनी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण मृत्युंजय सिंह ने 21 साल की उम्र में ही एडवर्टाइजमेंट टेक्नोलॉजी से रिलेटेड स्टार्टअप Adjuction.com की स्थापना की और उन्हें 20 दिन में ही मिल गयी 10 लाख की फंडिंग। मृत्युजंय सिंह के पिता पेशे से एक छोटे किसान है और बड़े भाई एक प्राईवेट जॉब करते हैं और माँ हाउस वाइफ हैं। मृत्युंजय ने अपनी कंपनी की शुरुआत अपने पिताजी से 1,800 रुपये कर्ज लेकर शुरू की थी। कहते हैं अगर आपमें कुछ कर गुज़रने की चाहत हो तो सफलता खुद-ब-खुद ही मिल जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ उत्तर प्रदेश के चंदौली ज़िले के एक छोटे More Likes This पहला फ़ोन द्वारा Kajal Soam खण्ड - 02 महाराणा: सहस्त्र वर्षों का धर्मयुद्ध - भाग 3 द्वारा Hind Gaurav खण्ड - 01 महाराणा सहस्त्र वर्षों का धर्मयुद्ध - 1.. बाप्पा रावल : मेवाड़ के संस्थापक राजा द्वारा Hind Gaurav सम्राट अशोक : तलवार, युद्ध और धर्म - 1 द्वारा Rishav raj मैं दादा-दादी की लाड़ली - 1 द्वारा sapna यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (2) द्वारा Ramesh Desai नकल से कहीं क्रान्ति नहीं हुई - 1 द्वारा Dr. Suryapal Singh अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी