"आखर चौरासी" एक मार्मिक उपन्यास है जो 1984 के सिख विरोधी दंगों के परिप्रेक्ष्य में लिखा गया है। यह उपन्यास साम्प्रदायिक उन्माद और ऐतिहासिक हिंसा का प्रतीक है। लेखक कमल ने इस उपन्यास में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद फैलने वाली सिख विरोधी हिंसा को बड़े प्रभावी तरीके से चित्रित किया है। उपन्यास में विभिन्न पात्रों की भयावह मनोदशाओं के माध्यम से यह सवाल उठाया गया है कि राजनीति और सम्प्रदाय की बुराइयों के सामने मानवता क्यों कुचली जाती है। कहानी का एक हिस्सा हरनाम सिंह के इर्द-गिर्द घूमता है, जो कोयला खदान में काम करता है। वह अपनी ड्यूटी के बाद थका हुआ महसूस करता है और अपने सहकर्मी सुरेश के साथ बातचीत करता है, जो उसकी चिंता करता है। सुरेश उसे आराम करने की सलाह देता है, क्योंकि वह जल्द ही रिटायर होने वाला है। उपन्यास का अंत मानवता की खोज की ओर संकेत करता है, जिससे सामुदायिकता और एकता की भावना को बढ़ावा मिले। यह उपन्यास न केवल व्यक्तिगत कहानियों को दर्शाता है, बल्कि समाज में साम्प्रदायिकता के खतरों को भी उजागर करता है। आखर चौरासी - 1 Kamal द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां 8.5k 10k Downloads 12.5k Views Writen by Kamal Category सामाजिक कहानियां पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण कोयला खदान की गहराई से ऊपर धरती की सतह तक आने में हरनाम सिंह बुरी तरह थक चुके थे। खाखी रंग के हाफ पैंट और शर्ट पर कई जगह कोयले की कलिख लगी थी, जो खदान की गहराई से उनके साथ ही चुपके से निकल आयी थी। हाजरी बाबू के ऑफिस की बगल में बने ओवरमैन के अपने कार्यालय कक्ष में पहुँचकर उन्होंने कमर से अपनी बेल्ट खोली। उस बेल्ट के साथ ही पीठ की ओर कमर पर बंधी, दो-ढाई किलो वज़न वाली, कैप-लैम्प की बैटरी भी उतार कर उन्होंने टेबल पर रख दी। हाथ में थमा डयूटी वाला मज़बूत डंडा वे पहले ही कोने में रख चुके थे। कोयला खदान की काली अँधेरी गहराइयों में बस यही दो चीज़ें सब के साथ होती हैं, उनकी रक्षक भी और उनकी मार्गदर्शक भी। Novels आखर चौरासी कोयला खदान की गहराई से ऊपर धरती की सतह तक आने में हरनाम सिंह बुरी तरह थक चुके थे। खाखी रंग के हाफ पैंट और शर्ट पर कई जगह कोयले की कलिख लगी थी, जो खदान... More Likes This मुक्त - भाग 13 द्वारा Neeraj Sharma मांई के मांई द्वारा Anant Dhish Aman हंटर - 2 द्वारा Ram Make अंधविश्वास - अंधेरा नहीं, सोच बदलो - 1 द्वारा Kaushik dave टूटता हुआ मन - भाग 1 द्वारा prem chand hembram अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3 द्वारा archana क्या सब ठीक है - 1 द्वारा Narayan Menariya अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी