कहानी "साढ़े तीन आने" में सिद्दीक़ रिज़वी, एक पूर्व कैदी, अपने जुर्म और जेल के अनुभवों के बारे में बात करता है। वह बताता है कि उसने क्यों एक इंसान का क़तल किया और उसकी कहानी को समझने के लिए आवश्यक संदर्भ को साझा करता है। रिज़वी का मानना है कि जेल सुधारने में असफल है और यह एक पुरानी और जानी-पहचानी सच्चाई है। वह अपनी रिहाई के बाद एक समूह के साथ बैठकर चर्चा करता है, जहाँ वह अपनी सोच और विचार साझा करता है। रिज़वी का कहना है कि हर जुर्म के पीछे एक इतिहास और जीवन के घटनाक्रम होते हैं, जो समझने के लिए जरूरी हैं। उसके विचारों से यह स्पष्ट होता है कि वह न केवल अपने जुर्म के बारे में सोचता है, बल्कि उस समाज और परिस्थितियों पर भी विचार करता है, जिसने उसे इस स्थिति में पहुँचाया। कहानी में जेल के सिस्टम और इंसान के भीतर के जुर्म को समझने की कोशिश की गई है, साथ ही यह भी कि कैसे एक व्यक्ति की कहानी उसके कार्यों का संदर्भ देती है। साढ़े तीन आने Saadat Hasan Manto द्वारा हिंदी लघुकथा 15.8k 4.4k Downloads 15.6k Views Writen by Saadat Hasan Manto Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण “मैंने क़तल क्यूँ किया। एक इंसान के ख़ून में अपने हाथ क्यूँ रंगे, ये एक लंबी दास्तान है । जब तक मैं उस के तमाम अवाक़िब ओ अवातिफ़ से आप को आगाह नहीं करूंगा, आप को कुछ पता नहीं चलेगा...... मगर उस वक़्त आप लोगों की गुफ़्तगु का मौज़ू जुर्म और सज़ा है। इंसान और जेल है...... चूँकि मैं जेल में रह चुका हूँ, इस लिए मेरी राय नादुरुस्त नहीं हो सकती। मुझे मंटो साहब से पूरा इत्तिफ़ाक़ है कि जेल, मुजरिम की इस्लाह नहीं कर सकती। मगर ये हक़ीक़त इतनी बार दुहराई जा चुकी है कि उस पर ज़ोर देने से आदमी को यूं महसूस होता है जैसे वो किसी महफ़िल में हज़ार बार सुनाया हुआ लतीफ़ा बयान कर रहा है....... और ये लतीफ़ा नहीं कि इस हक़ीक़त को जानते पहचानते हुए भी हज़ारहा जेल ख़ाने मौजूद हैं। Novels मंटो की दिलचस्प कहानियाँ मैं आज आप को चंद शिकारी औरतों के क़िस्से सुनाऊंगा। मेरा ख़याल है कि आप को भी कभी उन से वास्ता पड़ा होगा। मैं बंबई में था। फिल्मिस्तान से आम तौर पर बर्... More Likes This प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2 द्वारा Abantika हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar उड़ान (1) द्वारा Asfal Ashok नौकरी द्वारा S Sinha रागिनी से राघवी (भाग 1) द्वारा Asfal Ashok अभिनेता मुन्नन द्वारा Devendra Kumar यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) द्वारा Ramesh Desai अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी