इंद्रधनुष सतरंगा - 4 Mohd Arshad Khan द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

इंद्रधनुष सतरंगा - 4

Mohd Arshad Khan द्वारा हिंदी प्रेरक कथा

शाम को जब सारे लोग पार्क में टहल रहे थे तो घोष बाबू ने कहा, ‘‘आज कितना सूना-सूना लग रहा है।’’ ‘‘हाँ, सचमुच,’’ गायकवाड़ उदासी से बोले। ‘‘पंडित जी हम लोगों के बीच उठते-बैठते ही कितना थे? पर आज उनके न ...और पढ़े