कभी यूँ भी तो हो... - 2 प्रियंका गुप्ता द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

कभी यूँ भी तो हो... - 2

प्रियंका गुप्ता द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां

दो-तीन दिनो तक मेरी हिम्मत ही नहीं हुई थी सागर को फोन करने की...फिर आखिरकार फोन कर ही दिया। उसने फोन उठाया भी...बात भी की...। नाराज़ तो था, पर जाहिर नहीं कर रहा था...। न ही फोन काटने की ...और पढ़े